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बीएससी सेमेस्टर-1 जन्तु विज्ञान

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2022
पृष्ठ :180
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2657
आईएसबीएन :0

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बीएससी सेमेस्टर-1 जन्तु विज्ञान

अध्याय - 4

कोशिका चक्र, कोशा विभाजन तथा कोशिका संकेतक

(Cell Cycle, Cell Division and Cell Signalling)

 

प्रश्न- कोशिका चक्र से आप क्या समझते हैं? इण्टरफेज में पायी जाने वाली कोशिका चक्र की विभिन्न प्रावस्थाओं का वर्णन कीजिए।

सम्बन्धित लघु उत्तरीय प्रश्न
1. निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए:
(i) M प्रावस्था
(ii) Gro प्रावस्था
(iii) कोशिका चक्र |

उत्तर -

कोशिका चक्र
(Cell Cycle)

कोशिका चक्र किसी कोशिका के जीवन काल में होने वाली घटनाओं का वह सम्पूर्ण क्रम है जो एक केन्द्रकीय विभाजन के अंत से लेकर अगले केन्द्रीय विभाजन के प्रारम्भ होने के मध्य घटित होता है। यह चक्र कोशिका के बनने से प्रारम्भ होता है और उस कोशिका के विभाजन के पूरा होने तक रहता है। संतति कोशाएं वृद्धि करती हैं और वृद्धि की चरम सीमा पर पहुँच कर विभाजित होती हैं। अतः सभी विभाजित होने वाली कोशिकाओं को कोशिका चक्र से गुजरना पड़ता है। कोशिका चक्र की विभिन्न अवस्थाओं की खोज हॉवर्ड (Haward) तथा पेल्क (Pelc) ने 1953 में की थी। कोशिका चक्र को निम्न दो अवस्थाओं में बाँटा जा सकता है।

(i) वृद्धि या इण्टरफेज या नॉन-विभाजन प्रावस्था (growth or interphase or non- division phase)
(ii) विभाजन प्रावस्था (division phase)

ये दोनों प्रावस्थाएँ मिलकर कोशिका चक्र का निर्माण करती हैं अर्थात् इन दोनों प्रावस्थाओं को सम्मिलित रूप से कोशिका चक्र कहते हैं।

कोशिका चक्र का समय ठीक प्रकार से निर्धारित करने के लिए प्रायः सिनेमेटोग्राफी (cinematographic) विधि का प्रयोग किया जाता है स्तनधारियों की विभिन्न कोशिकाओं के कोशिका चक्र के समय में अनेक भिन्नताएँ पायी जाती हैं। शरीर की अधिकांश कोशिकाओं में कोशिका चक्र की अवधि प्रायः 20 घण्टे या इससे भी अधिक होती है, परन्तु कुछ कशिकाओं में कोशिका चक्र की अवधि 11 या 12 घण्टे की होती है।

1. कोशिका की इण्टरफेज या वृद्धि या नॉन-विभाजन फेज (Interphase or Growth Phase or Non-division Phase of Cell) : दो सूत्री विभाजनों या दो क्रमिक विभाजनों के बीच की विश्रामावस्था को इण्टरफेज कहते हैं जो कि कोशिका चक्र की प्रथम अवस्था है। इस अवस्था के अन्तर्गत कोशिका में गुणसूत्र तथा कोशिकाद्रव्य का कोई विभाजन नहीं होता लेकिन केन्द्रक तथा कोशिकाद्रव्य उपापचयिक रूप से काफी सक्रिय अवस्था में रहते हैं, अर्थात् इस समय में कोशिका पुनः विभाजन के लिये अपनी तैयारी करती है। इस अवस्था को प्रारम्भिक प्रावस्था (preparatory phase) भी कहते हैं। शरीर की कोशिकाएँ अपने जीवनकाल का अधिकांश समय इसी अवस्था में व्यतीत करती हैं तथा इसी अवस्था के अन्तर्गत कोशिका में जैव संश्लेषण (biosynthesis) सम्बन्धी क्रियाएँ उच्च सीमा पर होती है। इसीलिए कोशिका को इस प्रावस्था को मेटाबोलिक प्रावस्था (metabolic phase) भी कहते हैं। इस प्रावस्था के अन्तर्गत कोशिका में उपस्थित गुणसूत्र का द्विगुणन (duplication) होता है तथा कोशिका विभाजन हेतु आवश्यक सभी पदार्थों का संश्लेषण तथा संचयन होता है अर्थात् कोशिका में न्यूक्लियर तथा साइटोप्लाजिक पदार्थों की मात्रा में वृद्धि होती है जिससे कोशिका आयतन में बढ़ जाती है। स्तनियों की तन्त्रिका कोशिकाएँ (neurons or nerve cell) जिनमें कोशिका विभाजन क्रिया अनुपस्थित होती है, अपना सम्पूर्ण जीवनकाल इसी इण्टरफेज अवस्था में व्यतीत करती है।

कोशिका चक्र को संश्लेषण क्रियाओं के आधार पर निम्न प्रावस्थाओं (प्रावस्था phases) या में विभाजित किया गया है -

(i) Go प्रावस्था (Go Phase)- कोशिका चक्र की यह सुप्तावस्था (dormancy phase) :  है। इस अवस्था में कोशिका कोई भी कार्य सम्पादित नहीं करती है। अधिकांश स्तनधारियों की कोशिकाओं में यह प्रावस्था बहुत सामान्य रूप से पायी जाती है। कोशिकाएँ जो सदैव Go अवस्था में रहती हैं, पोस्ट- माइटोटिक कोशिकाएँ कहलाती हैं।

स्तनियों के शरीर की यदाकदा विभाजित होने वाली कोशिकाएँ जैसे रुधिर की लिम्फोसाइट्स कोशिकाएँ तथा कभी विभाजित न होने वाली कोशिकाएँ जैसे तन्त्रिका कोशिकाएँ, का कोशिका चक्र Go प्रावस्था में रुक जाता है। इस प्रावस्था में यदि शारीरकीय परिस्थितियाँ परिवर्तित होती हैं तो कोशिका Go प्रावस्था से G प्रावस्था में प्रवेश कर जाती है।

(ii) G1 प्रावस्था या पोस्ट माइटॉटिक फेज (G1 - phase or Post-mitotic Phase) : यह प्रावस्था इण्टरफेज की प्रथम उपावस्था है जो कोशिका में कोशिका विभाजन के तुरन्त बाद पायी जाती है। इस उपावस्था के अन्तर्गत कोशिका में प्रोटीन एवं RNA का संश्लेषण होता है। इस प्रावस्था में DNA संश्लेषण के लिये आवश्यक विकरों, m-RNA, t-RNA, राइबोसोम्स तथा प्रोटीन्स का सक्रिय रूप से संश्लेषण एवं संग्रह होता है। साथ ही DNA के नाइट्रोजन क्षारों का भी संश्लेषण एवं संग्रह होता है। इस उपावस्था में गुणसूत्र लम्बे व पतले (extended and slender) तथा एक-दूसरे पर लिपटे रहते हैं तथा ये अधिक स्टेन नहीं लेते।,

इण्टरफेज में G1 प्रावस्था का समय निश्चित नहीं होता। इसका समय कोशिकाओं की फिजियोलॉजिकल प्रावस्था के अनुसार भिन्न-भिन्न होता है। लेकिन इसमें कोशिका चक्र के पूर्ण समय का 30-40% समय लगता है। स्तनियों की ऐसी कोशिकाओं में जिनका कोशिका चक्र 16 घण्टे में पूरा होता है, इस प्रावस्था की अवधि सामान्यतः 5 घण्टे की होती है।

इस प्रकार G1 - प्रावस्था कोशिका चक्र के नियमन में एक अत्यन्त महत्वपूर्ण परिस्थिति का निर्माण करती है क्योंकि इसी प्रावस्था में यह निर्णय होता है कि कोशिका पुनः विभाजन के लिये तैयारी होगी या यह Go में प्रविष्ट होगी।

(iii) S-प्रावस्था या DNA संश्लेषण की प्रावस्था (S-Phase or Phase of DNA Synthesis) : यह प्रावस्था G1 प्रावस्था के बाद प्रारम्भ होती है। S-प्रावस्था में कोशिका में DNA का संश्लेषण या द्विगुणन होता है जो कोशिका विभाजन के लिये अत्यन्त आवश्यक है। DNA के अतिरिक्त इस प्रावस्था में कोशिका उन विशेष प्रोटीनों (हिस्टोन्स) का भी संश्लेषण करती है जो DNA से सम्बन्धित होती है। इस प्रावस्था में कोशिका चक्र के पूर्ण समय का 30 से 50% समय लगता है।

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कोशिका चक्र के दौरान आणविक परिवर्तन

DNA का द्विगुणन (Duplication or Replication of DNA) : समसूत्री विभाजन के बाद एक मातृ कोशिका (mother cell) विभाजन के उपरान्त दो समान पुत्री कोशिकाओं (daughter cells) को उत्पन्न करती है। इस क्रिया में मातृ कोशिका का प्रत्येक गुणसूत्र लम्बाई में बँटकर दो अर्द्धगुणसूत्र या क्रोमेटिड्स (chromatids) को जन्म देता है। मातृ कोशिका तथा पुत्री कोशिकाओं में DNA के गुण तथा मात्रा का समान होना अनिवार्य है। इसीलिये मातृ कोशिका में विभाजन से DNA का संश्लेषण और उसका द्विगुणन होना अनिवार्य है। अतः प्रत्येक अर्द्ध-गुणसूत्र अपना जोड़ा पूरा करता है जिससे पुनः पूर्ण गुणसूत्र बन जाता है। DNA की मात्रा का द्विगुणन कोशिका चक्र या कोशिका विभाजन का मूल सिद्धान्त है।

DNA के द्विगुणन की आवश्यक सामग्री का संश्लेषण कोशिका में G, प्रावस्था में पूर्ण हो जाता है। यह सामग्री वही चार प्रकार के न्यूक्लिओटाइड्स हैं जिनसे DNA अणु का संश्लेषण होता है। DNA अणु न्यूक्लिओटाइड्स का एक बड़ा पॉलीमर है जिसमें दो पॉलीमर न्यूक्लिओटाइड्स श्रृंखलाएँ एक जुड़वाँ कुण्डलिनी (twin helix) के रूप में लिपटी रहती हैं। दोनों श्रृंखलाओं के न्यूक्लिओटाइड्स के नाइट्रोजन क्षार अन्दर की ओर आमने-सामने हाइड्रोजन बन्धों से जुड़े रहते हैं जबकि बाहर की ओर फॉस्फोरिक अम्ल के द्वारा द्विगुणन के समय कुछ एन्जाइमों द्वारा बन्ध एक-एक करके टूटते जाते हैं. जिससे DNA की कुण्डलिनी (helix) की दोनों श्रृंखलाएँ एक-दूसरे से अलग हो जाती हैं।

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कोशिका चक्र के दौरान गुणसूत्र में परिवर्तन

कोशिका में एडीनीन = A थाइमीन = T, साइटोसीन = C, तथा ग्वानीन = G के न्यूक्लिओटोइड्स स्वतन्त्र अवस्था में मिलते हैं जो DNA पॉलीमरेज एन्जाइम्स के द्वारा उत्प्रेरित होकर DNA की एक अर्द्ध-श्रृंखला की ओर आकर्षित होते हैं। अर्द्ध-श्रृंखला में एक स्थान पर यदि साइटोसीन C का न्यूक्लिओटाइड है तो उसके सामने ग्वानीन = G न्यूक्लिओटाइड और यदि एडीनीन = A का न्यूक्लिओटाइड है तो उसके सामने थाइमीन = T का न्यूक्लिओटाइड आकर्षित होता है, इस प्रकार दोनों अर्द्ध-श्रृंखला आपस में हाइड्रोजन बन्धों द्वारा जुड़ती चली जाती हैं। इस प्रकार DNA की प्रत्येक अर्द्ध- श्रृंखला पूर्ण सर्पिल श्रृंखला में परिवर्तित हो जाती है।

(iii) G2 - प्रावस्था या प्री-माइटॉटिक या द्वितीय वृद्धि प्रावस्था (Gg - Phase or Premitotic or Second Growth Phase) : कोशिका में गुणसूत्रीय DNA के संश्लेषण के उपरान्त तथा कोशिका विभाजन के प्रारम्भ के अन्तराल को G2- प्रावस्था या द्वितीय वृद्धि प्रावस्था कहते हैं, जो कोशिका में S - प्रावस्था के पश्चात् प्रारम्भ होती है। इस प्रावस्था में कोशिका के केन्द्रक में सामान्य से दोगुनी मात्रा गुणसूत्रीय DNA की उपस्थिति होती है। अतः केन्द्रक के आयतन में वृद्धि होती है। गुणसूत्र का संघनन भी इसी प्रावस्था में प्रारम्भ हो जाता है। इस प्रावस्था में कोशिका, कोशिका विभाजन हेतु न्यूक्लियर RNA, राइबोसोमल RNA तथा उन विशेष प्रोटीन्स का संश्लेषण करती है जिनसे केन्द्रक या माइटॉटिक स्पिण्डिल (nuclear or mitotic spindle) का निर्माण होता है। अतः G2 - प्रावस्था में कोशिका विभाजन के लिये अन्तिम तैयारी करती है जिसके बाद वह विभाजन प्रावस्था में प्रवेश करती है। इस प्रावस्था में कोशिका चक्र के पूर्ण समय का 10-20% समय लगता है।

2. कोशिका की विभाजन प्रावस्था या माइटॉटिक प्रावस्था या अथवा D-फेज (Division or Mitotic or M or D phase of Cell) : यह प्रावस्था कोशिका चक्र की अन्तिम प्रावस्था है जो G2 - प्रावस्था के पश्चात् आती है। उपरोक्त तीनों प्रावस्थाओं में विभिन्न प्रकार के अणुओं का संश्लेषण करती हुई कोशिका पूर्ण वृद्धि प्राप्त कर लेती है। अब यह कोशिका चक्र की अन्तिम M - प्रावस्था में प्रवेश करके विभाजित होती है और दो पुत्री कोशिकाओं को जन्म देती है। इसमें माइटोसिस की वास्तविक क्रियाएँ- प्रोफेज, मेटाफेज, ऐनाफेज तथा टीलोफेज पायी जाती हैं। इस प्रावस्था में पूर्ण कोशिका चक्र का 5-10% समय लगता है।

कोशिका का इस प्रकार विभाजित होना एक निरन्तर प्रक्रिया के रूप में होता है, अतः इन सभी प्रक्रियाओं तथा परिवर्तनों के फलस्वरूप कोशिका के एक से दो में बँटने को कोशिका विभाजन (cell division) कहते हैं। इस प्रकार शरीर की कोशिकाओं में वृद्धि के साथ-साथ नयी कोशिकाएँ बनती रहती हैं। नयी कोशिकाएँ धीरे-धीरे वृद्धि करती हैं और फिर उनमें वही अवस्था आ जाती है अर्थात उनमें विभाजन होने लगता है। इस प्रकार कोशिकाओं का यह कोशिका चक्र चलता रहता है।

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- कोशा कला की सूक्ष्म संरचना जानने के लिए सिंगर और निकोल्सन की तरल मोजैक विचारधारा का वर्णन कीजिए।
  2. प्रश्न- कोशिका सिद्धान्त से आप क्या समझते हैं? प्राणि कोशिका का नामांकित चित्र बनाइए तथा पाँच कोशिका उपांगों के मुख्य कार्यों का वर्णन कीजिए।
  3. प्रश्न- निम्नलिखित वैज्ञानिकों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए - (i) एन्टोनी वान ल्यूवेन हॉक (ii) श्लीडेन तथा श्वान्स
  4. प्रश्न- अन्तरकोशिकीय संचार या कोशिका कोशिका अन्तर्क्रिया पर टिप्पणी लिखिए।
  5. प्रश्न- कोशिका-एडहेसन का वर्णन कीजिए।
  6. प्रश्न- निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए - (i) माइक्रोट्यूब्ल्स (ii) माइक्रोफिलामेन्टस (iii) इन्टरमीडिएट फिलामेन्ट
  7. प्रश्न- माइटोकॉण्ड्रिया की संरचना व कार्यों का वर्णन कीजिए।
  8. प्रश्न- एण्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम की संरचना तथा कार्यों का विस्तृत वर्णन कीजिए।
  9. प्रश्न- राइबोसोम की संरचना एवं कार्यों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
  10. प्रश्न- परऑक्सीसोम पर टिप्पणी लिखिए।
  11. प्रश्न- वेंकटरमन रामाकृष्णन पर टिप्पणी लिखिए।
  12. प्रश्न- बाह्य प्रोटीन और समाकल प्रोटीन कोशिका कला की पारगम्यता को किस प्रकार प्रभावित करती हैं?
  13. प्रश्न- हरितलवक और माइटोकॉण्ड्रिया में मिलने वाले समान लक्षणों का वर्णन कीजिए।
  14. प्रश्न- परॉक्सीसोम किन कोशिकांगों के साथ मिलकर प्रकाशीय श्वसन (फोटोरेस्पिरेशन) की क्रिया सम्पन्न करता है? प्रकाशीय श्वसन के जैविक कार्यों की समीक्षा प्रस्तुत कीजिए।
  15. प्रश्न- केन्द्रक की संरचना का चित्र सहित वर्णन कीजिए।
  16. प्रश्न- उपयुक्त आरेखों के साथ गुणसूत्र आकारिकी व परासंरचना का वर्णन कीजिए।
  17. प्रश्न- “गुणसूत्रों की विशेष किस्में” विषय पर एक निबन्ध लिखिए।
  18. प्रश्न- न्यूक्लिक अम्ल क्या होते हैं? डी.एन.ए. की संरचना तथा प्रकृति का वर्णन कीजिए।
  19. प्रश्न- वाट्सन तथा क्रिक के द्वारा प्रस्तुत डी. एन. ए. की संरचना का वर्णन कीजिए तथा डी. एन. ए. के विभिन्न प्रकार बताइए।
  20. प्रश्न- राइबोन्यूक्लिक अम्लों की रचना का वर्णन कीजिए तथा इसके जैविक एवं जैव-रासायनिक महत्व पर प्रकाश डालिए।
  21. प्रश्न- मेसेल्सन एवं स्टेहल के उस प्रयोग का वर्णन कीजिए जो अर्द्ध-संरक्षी डी. एन. ए. पुनरावृत्ति को प्रदर्शित करता है।
  22. प्रश्न- जेनेटिक कोड पर टिप्पणी लिखिए।
  23. प्रश्न- गुणसूत्रों की रचना एवं प्रकार का वर्णन कीजिए।
  24. प्रश्न- न्यूक्लिओसोम का वर्णन कीजिए।
  25. प्रश्न- सहलग्नता क्या है? उचित उदाहरण देते हुए इसके महत्त्व की चर्चा कीजिए।
  26. प्रश्न- क्रॉसिंग ओवर को उदाहरण सहित समझाइए तथा इसके महत्व पर प्रकाश डालिए।
  27. प्रश्न- सेण्ट्रोसोम की परिभाषा लिखिए।
  28. प्रश्न- क्रोमेटिन के प्रकारों को बताते हुए हेटेरोक्रोमेटिन को विस्तार से समझाइये।
  29. प्रश्न- किसी एक प्रायोगिक साक्ष्य द्वारा सिद्ध कीजिये कि डी.एन.ए. ही आनुवांशिक तत्व है।
  30. प्रश्न- गुणसूत्र पर पाये जाने वाले विभिन्न अभिरंजन और पट्टिका प्रतिमानों का वर्णन कीजिए।
  31. प्रश्न- B गुणसूत्र का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
  32. प्रश्न- डी.एन.ए. और आर.एन.ए. में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  33. प्रश्न- RNA कौन-सा आनुवंशिक कार्य DNA की तरह पूरा करता है?
  34. प्रश्न- नीरेनबर्ग तथा एच.जी.खोराना के योगदान का वर्णन कीजिए।
  35. प्रश्न- क्या RNA का एक स्ट्रेण्ड दूसरा स्ट्रेण्ड संश्लेषित कर सकता है?
  36. प्रश्न- DNA की संरचना फॉस्फोरिक एसिड, पेन्टोज शर्करा तथा नत्रजन क्षार से होती है। इसके वस्तुतः आनुवंशिक तत्व कौन से हैं?
  37. प्रश्न- वाटसन एण्ड क्रिक पर टिप्पणी लिखिए।
  38. प्रश्न- DNA की पुनरावृत्ति में सहायक एन्जाइमों का वर्णन कीजिए।
  39. प्रश्न- कोशिका चक्र से आप क्या समझते हैं? इण्टरफेज में पायी जाने वाली कोशिका चक्र की विभिन्न प्रावस्थाओं का वर्णन कीजिए।
  40. प्रश्न- समसूत्री कोशिका विभाजन का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए तथा समसूत्री के महत्व पर एक टिप्पणी लिखिए।
  41. प्रश्न- अर्धसूत्री कोशिका विभाजन का सविस्तार वर्णन कीजिए तथा इसके महत्व का उल्लेख कीजिए।
  42. प्रश्न- समसूत्री तथा अर्धसूत्री विभाजन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  43. प्रश्न- एक संकर संकरण क्या है? कम से कम दो उदाहरणों को बताइए।
  44. प्रश्न- स्वतन्त्र अपव्यूहन के नियम को समझाइए।
  45. प्रश्न- एक उपयुक्त उदाहरण देते हुए अपूर्ण प्रभाविकता पर एक टिप्पणी लिखिए।
  46. प्रश्न- जन्तुओं में लिंग निर्धारण की विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए।
  47. प्रश्न- मानव में लिंग निर्धारण कैसे होता है?
  48. प्रश्न- लिंग निर्धारण में प्राकृतिक कारकों के प्रभाव का उदाहरण सहित विस्तृत वर्णन कीजिए।
  49. प्रश्न- वंशानुगत तथा आनुवंशिकी में अन्तर बताइए।
  50. प्रश्न- आनुवंशिकी का जनक किसको वस्तुतः कहा जाता है?
  51. प्रश्न- समप्रभाविता की वंशागति को समझाइए।
  52. प्रश्न- “समलक्षणी जीवों की जीनी संरचना भिन्न हो सकती है। यह कथन सही है अथवा गलत? क्यों?
  53. प्रश्न- ग्रीगर जॉन मेण्डल के योगदान को रेखांकित कीजिए।
  54. प्रश्न- कौन-सा कोशिका विभाजन गैमीट पैदा करता है?
  55. प्रश्न- स्यूडोडोमिनेंस पर टिप्पणी लिखिए।
  56. प्रश्न- टेस्ट क्रॉस एवं बैक क्रॉस में अन्तर बताइए।
  57. प्रश्न- टेस्ट क्रॉस तथा बैक क्रॉस को समझाइए।
  58. प्रश्न- मानव में बार बॉडी के महत्व को समझाइये।
  59. प्रश्न- लिंग प्रभावित वंशागति एवं लिंग सीमित वंशागति में अन्तर बताइए।
  60. प्रश्न- लिंग सहलग्न, लिंग प्रभावित और लिंग सीमाबद्धित लक्षणों के बीच सोदाहरण विभेदकीजिए।
  61. प्रश्न- मेरी एफ. लिओन की परिकल्पना समझाइए।
  62. प्रश्न- कारण स्पष्ट कीजिए कि नर मधुमक्खी में शुक्राणुओं का निर्माण समसूत्री विभाजन द्वारा क्यों होता है?
  63. प्रश्न- ZW टाइप लिंग निर्धारण पर टिप्पणी लिखिए।
  64. प्रश्न- पक्षियों में लिंग निर्धारण प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
  65. प्रश्न- स्तनधारी मादा की शुरूआती अवस्था में कौन-सा X क्रोमोसोम हेट्रोक्रोमेटाइज हो जाता है, माता का या पिता का?
  66. प्रश्न- मल्टीपिल ऐलीलिज्म पर एक निबन्ध लिखिए।
  67. प्रश्न- Rh-तत्व क्या है? इसके महत्व एवं वंशागति का वर्णन कीजिए।
  68. प्रश्न- जीन की अन्योन्य क्रिया से आप क्या समझते हैं? उदाहरणों की सहायता से जीन की अन्योन्य क्रिया की विधि का वर्णन कीजिए।
  69. प्रश्न- सहलग्नता क्या है? उचित उदाहरण देते हुए इसके महत्त्व की चर्चा कीजिए।
  70. प्रश्न- क्रॉसिंग ओवर को उदाहरण सहित समझाइए तथा इसके महत्व पर प्रकाश डालिए।
  71. प्रश्न- एक स्त्री का रक्त समूह 'AB' व उसके बच्चे का रक्त समूह '0' है। कारण सहित स्पष्ट कीजिए कि उस बच्चे के पिता का रक्त समूह क्या होगा?
  72. प्रश्न- एक Rh + स्त्री, Rh पुरुष से शादी करती है। इनकी संतति में एरेथ्रोब्लास्टोसिस की क्या सम्भावना है?
  73. प्रश्न- लैंडस्टीनर के योगदान का वर्णन कीजिए।
  74. प्रश्न- रक्त समूह को समझाइए।
  75. प्रश्न- जिनोम को परिभाषित कीजिए।
  76. प्रश्न- 'गृह व्यवस्थापक जीन' या 'रचनात्मक जीन' के बारे में बताइये।
  77. प्रश्न- प्रभावी तथा एपीस्टेटिक जीन में क्या अन्तर है?
  78. प्रश्न- लीथल जीन्स पर टिप्पणी लिखिए।
  79. प्रश्न- पूरक जीन क्रिया को परिभाषित कीजिए।
  80. प्रश्न- गुणसूत्र पर पाये जाने वाले विभिन्न अभिरंजन और पट्टिका प्रतिमानों का वर्णन कीजिए।
  81. प्रश्न- हेट्रोक्रोमेटिन और उसके लक्षण पर टिप्पणी लिखिए।
  82. प्रश्न- क्रासिंग ओवर उद्विकास की प्रक्रिया है। स्पष्ट कीजिए।
  83. प्रश्न- लिंकेज ग्रुप पर टिप्पणी लिखिए।
  84. प्रश्न- सामान्य मानव कैरियोटाइप का वर्णन कीजिए।
  85. प्रश्न- गुणसूत्रीय विपथन पर एक निबन्ध लिखिए।
  86. प्रश्न- असुगुणिता किसे कहते हैं? विभिन्न प्रकार की असुगुणिताओं का वर्णन कीजिए तथा इनकी उत्पत्ति के स्रोत बताइए।
  87. प्रश्न- लिंग सहलग्न वंशागति से आप क्या समझते हैं? मनुष्य या ड्रोसोफिला के सन्दर्भ में इस परिघटना का उदाहरणों सहित विवेचन कीजिए।
  88. प्रश्न- क्लाइनफिल्टर सिंड्रोम कार्यिकी अथवा गुणसूत्र के असामान्य स्थिति का परिणाम है। स्पष्ट कीजिए।
  89. प्रश्न- मंगोलिज्म या डाउन सिन्ड्रोम क्या है?
  90. प्रश्न- टर्नर सिन्ड्रोम उत्पन्न होने के कारण एवं उनके लक्षण लिखिए।
  91. प्रश्न- समक्षार उत्परिवर्तन पर टिप्पणी लिखिए।
  92. प्रश्न- अनुप्रस्थ विस्थापन पर टिप्पणी लिखिए।
  93. प्रश्न- पोजीशन एफेक्ट क्या है? उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
  94. प्रश्न- लिंग सहलग्नता प्रक्रिया को समसूत्री नर व समसूत्री मादा में स्पष्ट कीजिए।
  95. प्रश्न- वर्णान्ध व्यक्ति रेलवे ड्राइवर क्यों नहीं नियुक्त किये जाते हैं?
  96. प्रश्न- मानव वंशागति के अध्ययन में क्या मुख्य कठिनाइयाँ हैं?
  97. प्रश्न- संक्रामक जीनों से आप क्या समझते हैं?
  98. प्रश्न- वंशावली विश्लेषण पर टिप्पणी लिखिए।
  99. प्रश्न- लिंग सहलग्न वंशागति के प्रारूप का वर्णन कीजिए।
  100. प्रश्न- अफ्रीकी निद्रा रोगजनक परजीवी की संरचना एवं जीवन चक्र का वर्णन कीजिए।
  101. प्रश्न- वुचरेरिया बैन्क्रोफ्टाई के वितरण, स्वभाव, आवास तथा जीवन चक्र का वर्णन कीजिए।
  102. प्रश्न- जिआर्डिया पर एक विस्तृत लेख लिखिए।
  103. प्रश्न- एण्टअमीबा हिस्टोलायटिका की संरचना, जीवन-चक्र, रोगजन्यता एवं नियंत्रण का वर्णन कीजिए।
  104. प्रश्न- अफ्रीकी निद्रा रोग क्या है? यह कैसे होता है? इसके संचरण एवं रोगजनन को समझाइए। इस रोग के नियंत्रण के उपाय बताइए।
  105. प्रश्न- फाइलेरिया क्या है? इसके रोगजनकता एवं लक्षणों तथा निदान का वर्णन कीजिए।
  106. प्रश्न- जिआर्डिया के प्रजनन एवं संक्रमित रोगों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
  107. प्रश्न- जिआर्डिया में प्रजनन पर टिप्पणी लिखिए।
  108. प्रश्न- जिआर्डिया पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

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